हाल ही में 14 अगस्त को व्हाइट हाउस की ऑफिस ऑफ ट्रेड एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' रिपोर्ट में भारत समेत 40 से अधिक देशों पर चीन द्वारा अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए अवैध री-रूटिंग नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया है. भारत सरकार ने अमेरिका की इस रिपोर्ट के तहत लगाये गये आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत में सख्त कस्टम्स रूल्स और मजबूत कानून लागू हैं.
रूस और ईरान की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिश
इससे पहले सात अगस्त को अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ एक कठोर विधेयक पारित किया है. यदि यह विधेयक निचले सदन, यानी प्रतिनिधि सभा से मंजूर हो जाता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और चीन जैसे प्रमुख तेल खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जायेगा. इस कदम का मुख्य उद्देश्य रूस और ईरान की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बनाना तथा उनके युद्ध प्रयासों के वित्तीय स्रोतों को रोकना है. इसमें दो राय नहीं कि अमेरिका द्वारा रूस पर संभावित नये और सख्त प्रतिबंध भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा वैश्विक जोखिम बन रहे हैं. हालांकि, भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंधों के कारण व्यापार पूरी तरह समाप्त नहीं होगा और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की संभावनाएं बनी रहेंगी, फिर भी सुचारु व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव पड़ सकता है.
ऊर्जा क्षेत्र भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी है, क्योंकि रूस भारत के लिए सस्ते कच्चे तेल का प्रमुख स्रोत रहा है. नये प्रतिबंधों के कारण भुगतान प्रणालियों और तेल आयात में रुकावट आती है, तो इससे घरेलू कंपनियों की लागत और देश का कुल आयात बिल बढ़ सकता है. वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता और गिरावट देखी जा सकती है.
एच-1बी और एल-1 वीजा
यदि हम अमेरिका से लगातार बढ़ती हुई वीजा संबंधी मुश्किलों को देखें, तो पाते हैं कि हाल ही में 10 अगस्त को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एच-1बी और एल-1 वीजा के विस्तार आवेदनों पर अतिरिक्त शुल्क लागू करने की घोषणा की. आगामी नौ सितंबर से लागू होने वाले इस नियम के तहत एच-1बी वीजा विस्तार के लिए 4,000 डॉलर और एल-1 विस्तार के लिए 4,500 डॉलर शुल्क देना होगा. यह नियम 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली उन बड़ी कंपनियों पर लागू होगा, जिनके 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी इन्हीं वीजा पर हैं. इसका भुगतान सीधे कंपनियों को करना होगा.
अमेरिकी संसद में कार्य वीजा पर रोक लगाने संबंधी विधेयक पेश
इसी परिप्रेक्ष्य में 25 जुलाई को अमेरिकी संसद में कार्य वीजा पर तीन साल तक रोक लगाने संबंधी एक नया और बेहद सख्त विधेयक पेश किया गया है. इस विधेयक के लागू होने से तकनीकी क्षेत्र के भारतीय पेशेवरों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है. नये प्रस्तावों में 1,00,000 डॉलर तक का भारी-भरकम शुल्क और कठोर न्यूनतम वेतन मानदंड शामिल हैं. इसके तहत, पारंपारिक लॉटरी प्रणाली समाप्त कर केवल उच्च वेतन और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की तैयारी है. इसके अतिरिक्त, वीजा धारकों के आश्रितों और परिजनों पर भी कई पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव है. हालांकि, एक लाख डॉलर की फीस वाले प्रशासनिक आदेश पर अदालती रोक फिलहाल बरकरार है, फिर भी संसद में पेश इस विधेयक ने अनिश्चितता बढ़ा दी है.
अमेरिका ने 17 देशों से आने वाले सामान पर लगाया 10 प्रतिशत का अतिरिक्त सीमा शुल्क
गौरतलब है कि 24 जुलाई से अमेरिका द्वारा भारत समेत 17 देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाया गया है. अमेरिका ने व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत यह सख्त कदम उन देशों के खिलाफ उठाया है, जिनके उत्पादों के निर्माण में जबरन मजदूरी की शिकायतें मिली थीं. शुरुआत में भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव था, पर भारत द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में सुधार कर जबरन मजदूरी से बने सामान पर प्रतिबंध लगाने के कारण इसे घटाकर 10 फीसदी किया गया. इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासन द्वारा आयातित दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से एक अगस्त से नयी शुल्क नीति लागू कर दी गयी है. इसके तहत, एक अगस्त, 2026 से 31 जुलाई, 2028 तक आयातित दवाओं को शुल्क से मुक्त रखा गया है, ताकि अमेरिकी बाजार में दवा आपूर्ति बाधित न हो. इसके पश्चात, एक अगस्त, 2028 से 31 जुलाई, 2029 तक दवाओं के मूल्य पर 100 फीसदी सीमा शुल्क लागू किया जायेगा. फिर एक अगस्त, 2029 के बाद इस शुल्क को बढ़ाकर 200 प्रतिशत के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा दिये जाने की योजना है.
कार्य वीजाधारकों की 60 दिवसीय 'छूट अवधि' को समाप्त करने का प्रस्ताव अंतिम चरण में
इसके अलावा, अमेरिकी आंतरिक सुरक्षा विभाग द्वारा कार्य वीजाधारकों की 60 दिवसीय 'छूट अवधि' को समाप्त करने का प्रस्ताव अंतिम चरण की समीक्षा में है. वर्ष 2017 से लागू इस व्यवस्था के तहत नौकरी छूटने पर विदेशी कर्मचारियों को नयी नौकरी खोजने या अन्य वैध स्थिति प्राप्त करने के लिए 60 दिनों का समय मिलता है. यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो नौकरी जाने की स्थिति में विदेशी पेशेवरों को बिना किसी अतिरिक्त समय के तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा. इस तरह अमेरिका की ओर से भारत के लिए बढ़ती आर्थिक और व्यापारिक चुनौतियों के बीच भारत को अमेरिका के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति अत्यंत सतर्क रहना होगा. एक संतुलित और औपचारिक व्यापार समझौता भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों, जैसे औषधियों, रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, मसाले और हस्तशिल्प पर अमेरिकी शुल्क दरों को शून्य या न्यूनतम स्तर पर ला सकता है. इससे धारा 301 के तहत लगे 10 प्रतिशत शुल्क और जेनेरिक दवाओं पर भविष्य में लगने वाले भारी करों का प्रभाव स्वतः सीमित हो जायेगा. पर इस समय अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों का प्रभाव कम करने के लिए भारत को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना होगा. अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता घटाने के लिए लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया के गैर-पारंपरिक बाजारों में निर्यात का विस्तार करना आवश्यक है. साथ ही, यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को शीघ्र लागू करते हुए व्यापारिक विविधता सुनिश्चित करनी होगी.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
