एक ठोस संदेश

अन्य देशों को भारत की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और सामूहिक वैश्विक विकास के लिए प्रयासरत होना चाहिए.

भारत के विभिन्न शहरों में जी-20 समूह की बैठकों के आयोजन का सिलसिला जारी है. इसका मुख्य उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता से दुनिया को परिचित कराना तथा क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन देना है. लेकिन जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारत ने यह भी संदेश दिया है कि ये क्षेत्र भारत के अभिन्न अंग हैं तथा भारत की संप्रभुता के अंतर्गत आते हैं. उल्लेखनीय है कि चीन और पाकिस्तान इन इलाकों पर बेजा दावे करते रहे हैं.

कुछ समय पूर्व अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में हुए आयोजनों में चीन ने हिस्सा नहीं लिया था. अपनी हेठी को दोहराते हुए उसने जम्मू-कश्मीर में हो रही बैठकों के बहिष्कार की भी घोषणा की है. अगस्त, 2019 में प्रदेश की प्रशासनिक स्थिति में संशोधन के बाद से इस क्षेत्र को लेकर चीन और पाकिस्तान की बौखलाहट कुछ अधिक ही बढ़ गयी है. ऐसा कर चीन जहां पाकिस्तान को तुष्ट करना चाहता है, जिससे उसके बड़े आर्थिक हित जुड़े हुए हैं, वहीं वह कुछ अन्य देशों को भी दबाव में लाकर आयोजनों में शामिल होने से रोकना चाहता है.

पाकिस्तान की आपत्ति से सहमति दिखाते हुए तुर्की भी श्रीनगर के आयोजन में भाग नहीं लेगा. स्थान के चयन को लेकर पहले सऊदी अरब के असहज होने की खबरें भी आयी थीं, पर उसका प्रतिनिधि मंडल श्रीनगर आ रहा है. इसे भारतीय कूटनीति की सफलता के एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है. जब भी कोई देश किसी बहुराष्ट्रीय समूह का प्रमुख होता है या किसी सम्मेलन की मेजबानी करता है, तो जगह का चयन उसका विशेषाधिकार होता है.

पूरे साल आयोजित होने वाले जी-20 समूह के लगभग 200 बैठकों और कार्यक्रमों के लिए 50 शहरों का चुनाव किया गया है. चीन हो या तुर्की हो या कोई और देश, किसी आयोजन का बहिष्कार कर न केवल भारत की अध्यक्षता का तिरस्कार कर रहे हैं, बल्कि इस समूह के महत्व पर भी चोट कर रहे हैं. ऐसे रवैयों पर भारत का संदेश स्पष्ट है कि हमारी भूमि पर दूसरे देशों के निराधार दावे हमें उन क्षेत्रों में परियोजनाएं लाने, विकास के प्रयास करने, कार्यक्रम आयोजित करने आदि से नहीं रोक सकते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के प्रारंभ से ही अलग-अलग शहरों में बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और शिखर बैठक आयोजित करा रहे हैं. इससे उन स्थानों का त्वरित विकास होता है तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है. साथ ही, विदेशी आगंतुक भी भारत के असाधारण वैविध्य से परिचित होते हैं. अन्य देशों को भारत की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और सामूहिक वैश्विक विकास के लिए प्रयासरत होना चाहिए.

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Published by: संपादकीय

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