एक सराहनीय प्रयास

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से ऐसे तबके को लाभ होगा जो समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के बाद भी विकास की दौड़ में तेजी से नहीं बढ़ पा रहा.

पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों की मदद के लिए एक नयी योजना पर मुहर लगा दी गयी है. प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से ऐसे तबके को लाभ होगा जो समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के बाद भी विकास की दौड़ में तेजी से नहीं बढ़ पा रहा. योजना के तहत नाई, धोबी, बढ़ई, सुनार, राजमिस्त्री, लोहार, कुम्हार, मूर्तिकार, दर्जी, मालाकार, चर्मकार समेत कुल 18 पेशों से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी. इनसे हमारा वास्ता आय दिन पड़ता है, लेकिन हममें से अधिकतर लोग उन्हें बस ग्राहक के तौर पर पहचानते हैं.

हम उनकी सेवाएं या सामान लेते हैं, और इससे ज्यादा न हमें समझ आता है, न हमें समझने की जरूरत महसूस होती है. लेकिन, ध्यान से देखें तो इनमें से कई पेशे ऐसे हैं, जिनमें उस कारीगर और उसके परिवार की जिंदगी दिहाड़ी पर चलती है. जिस दिन काम नहीं होता, उस दिन पैसे भी नहीं मिलते. कल्पना कर सकते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान दिहाड़ी पर निर्भर लोगों की जिंदगी कैसे कटी होगी. असुरक्षा को अपनी नियति मान भगवान भरोसे जिंदगी बिताने वाले ऐसे तबकों के लिए, सरकारी स्तर पर कोई भी प्रयास मानवीय दृष्टि से एक सराहनीय कदम है.

घोषित 13,000 करोड़ रुपये की योजना से लगभग 30 लाख शिल्पकारों और कारीगरों को लाभ होगा. योजना के तहत पांच फीसदी के रियायती ब्याज दर पर दो चरणों में कर्ज देने की सुविधा दी जायेगी. पहले चरण में एक लाख और दूसरे चरण में दो लाख रुपये का कर्ज मिल सकेगा. यह राशि भले बहुत बड़ी नहीं लगती हो, लेकिन यह एक बड़ा कदम है. शहरों में होम लोन या कार लोन लेने वाले जानते हैं कि बैंक वाले सरकारी या स्थायी नौकरी वालों की तुलना में साधारण प्राइवेट नौकरी वालों को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं.

स्वाभाविक है कि दिहाड़ी काम करने वालों को कर्ज मिलना कठिन होगा. योजना के तहत लाभार्थी और उनके परिवारजनों को कौशल विकास, डिजिटल लेन-देन तथा उत्पादों की मार्केटिंग के लिए भी सहायता प्रदान की जायेगी. विश्वकर्मा पूजा के दिन से लागू होने वाली इस योजना का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में किया था. इस वर्ष आम बजट में भी इसकी घोषणा की गयी थी.

योजना का वृहत उद्देश्य इन तबकों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम स्तरीय उद्यमों या एमएसएमइ से जोड़ना है, ताकि ये शिल्पकार एक बड़ी शृंखला का हिस्सा बन सकें. अमीर उद्यमियों की हर कुछ अंतराल पर जारी होने वाली सूचियों के बीच कारीगरों और छोटे उद्यमियों का हाथ थामने की ऐसी कोशिशें जारी रहनी चाहिए.

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Published by: संपादकीय

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