बैंक हड़ताल का तरीका सही नहीं

पिछले दिनों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हड़ताल रही. इस हड़ताल का कोई परिणाम निकला या नहीं निकला, यह तो पता नहीं, पर लोग खूब परेशान हुए. आजकल हर जगह एटीएम के चलन की वजह से लोग घर पर ज्यादा पैसे रखते नहीं हैं. वे अपनी जरूरत के मुताबिक एटीएम से पैसे निकालते हैं. अब […]

पिछले दिनों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हड़ताल रही. इस हड़ताल का कोई परिणाम निकला या नहीं निकला, यह तो पता नहीं, पर लोग खूब परेशान हुए. आजकल हर जगह एटीएम के चलन की वजह से लोग घर पर ज्यादा पैसे रखते नहीं हैं. वे अपनी जरूरत के मुताबिक एटीएम से पैसे निकालते हैं.

अब इस हड़ताल के दौरान एटीएम तो खुले रहे, लेकिन संबंधित बैंकों की ओर से उनमें पैसे नहीं डाले गये थे. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का उनके ग्राहकों के प्रति भी कुछ दायित्व है. कई बैंक ग्राहकों की सुविधा को सर्वोपरि रखने का दावा करते हैं, लेकिन इस हड़ताल से सबसे ज्यादा असुविधा आम ग्राहकों को ही हुई. वेतन विसंगति के खिलाफ आंदोलन सही है, लेकिन सरकार से विरोध जताते हुए केवल सरकारी लेन-देन बाधित किया जाता, तो आम ग्राहकों को बेवजह परेशानी नहीं होती.

रीतेश सहाय, धनबाद

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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