हालिया दिनों में जिस तरह महिलाओं के साथ शर्मनाक और अप्रिय घटनाओं कि संख्या बढ़ती जा रही है, उसके मद्देनजर अब महिलाओं को भी अपनी आत्मरक्षा के पैंतरे सीखने चाहिए. आज जब एक बेटी स्कूल जाती है या एक महिला घर से बाहर निकलती है या फिर कोई कामकाजी महिला देर रात अपना काम निबटा घर लौट रही होती है, तो उनके घरवालों को यह चिंता होनी लाजिमी है कि क्या मेरी बेटी/बहू/पत्नी सुरक्षित है?
समाज में जहां अच्छे लोग हैं, वहीं बुराई की भी मौजूदगी नजरअंदाज नहीं किया जा सकती है. ऐसे में अगर बात खुद को महफूज रखने की आती है, तो क्यों न महिलाएं खुद अपनी हिफाजत का जिम्मा उठायें! हमारे आसपास ऐसे कई प्रशिक्षण केंद्र मौजूद हैं, जहां आत्मरक्षा के तरीके मामूली खर्च में सिखाये जाते हैं. जरूरत है, अपनी सुरक्षा के बारे में जिम्मेदार और सजग हो जाने की.
आनंद कानू, सिलीगुड़ी
