झारखंड में शिक्षा का मजाक

झारखंड का मानव संसाधन विकास मंत्रालय हाथी का दांत बन कर रह गया है. इसका काम सिर्फ बयान जारी करना रह गया है. इसीलए तो वह खुद कहता है कि शिक्षा विभाग भानुमती का पिटारा बन कर रह गया है. एक पर एक नयी समस्याएं पैदा हो जाती हैं. उनका यह बयान साबित करता है […]

झारखंड का मानव संसाधन विकास मंत्रालय हाथी का दांत बन कर रह गया है. इसका काम सिर्फ बयान जारी करना रह गया है. इसीलए तो वह खुद कहता है कि शिक्षा विभाग भानुमती का पिटारा बन कर रह गया है. एक पर एक नयी समस्याएं पैदा हो जाती हैं. उनका यह बयान साबित करता है कि शिक्षा विभाग अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पा रहा है.

शिक्षा विभाग में इतनी बयानबाजी की वजह क्या है? शिक्षा विभाग में लाखों की नियुक्ति होनी है, चाहे प्राथमिक शिक्षा हो या फिर विश्वविद्यालय, लगभग सभी क्षेत्रों में नियुक्ति होनी बंद है या फिर कछुए की गति से हो रही है. ये विवाद सामाजिक-सांस्कृतिक एकता खंडित कर रहे हैं. लागों को जोड़नेवाली शिक्षा के बहाने झारखंड के लोगों में वैमनस्यता का बीज बोया जा रहा है. कभी भाषा, तो कभी स्थानीयता का नाम देकर.

आनंद कुमार साहू, कोलेबिरा

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