परिवर्तन के लिए जरूरी है यह उबाल

दिल्ली में ‘आप’ की अप्रत्याशित जीत के बाद अब आगामी लोकसभा चुनाव हेतु देश की राजनीति में एक अच्छा-खासा उबाल आया है. इस पार्टी के बिजली, पानी और पक्के रोजगार आदि ढेर सारे वादों पर जनता, पार्टियां और कर्मचारी आदि सभी धरने, अनशन, नये-नये नारों के साथ जलसे-जुलूसों पर उतर आये हैं. हर तरफ एक […]

दिल्ली में ‘आप’ की अप्रत्याशित जीत के बाद अब आगामी लोकसभा चुनाव हेतु देश की राजनीति में एक अच्छा-खासा उबाल आया है. इस पार्टी के बिजली, पानी और पक्के रोजगार आदि ढेर सारे वादों पर जनता, पार्टियां और कर्मचारी आदि सभी धरने, अनशन, नये-नये नारों के साथ जलसे-जुलूसों पर उतर आये हैं.

हर तरफ एक नयी हलचल और आक्रोश का उबाल दिख रहा है. उधर कांग्रेस-भाजपा जनहित के कार्यक्रमों को छोड़, अपने बयानों से जहर ही उगल रहे हैं. केजरीवाल ने जो भ्रष्ट नेताओं की नयी लंबी-चौड़ी सूची पेश की है, उस पर तो कुछ नेता अलग से आगबबूला हो उठे हैं और उन्हें तुरंत माफी मांगने या मानहानि के मुकदमे की चेतावनी दे रहे हैं. वैसे तो स्वस्थ लोकतंत्र में ऐसा उबाल बहुत जरूरी है, क्योंकि इन्हीं से वांछित परिवर्तन हेतु जनता में राजनैतिक चेतना आती है.

वेद प्रकाश, नयी दिल्ली

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