‘आप’ का उदय एक नया विहान

आम आदमी पार्टी का उदय इस सड़ी-गली व्यवस्था में ताजा हवा के एक झोंके के समान है. ऐसा लग रहा है कि नवप्रभात हुआ है. सारे विश्व की जनता आश्चर्यचकित होकर भारत में इस नये प्रयोग को आशाभरी नजरों से देख रही है. अगर भारत में यह प्रयोग सफल हुआ, तो संसार के सभी देशों […]

आम आदमी पार्टी का उदय इस सड़ी-गली व्यवस्था में ताजा हवा के एक झोंके के समान है. ऐसा लग रहा है कि नवप्रभात हुआ है. सारे विश्व की जनता आश्चर्यचकित होकर भारत में इस नये प्रयोग को आशाभरी नजरों से देख रही है. अगर भारत में यह प्रयोग सफल हुआ, तो संसार के सभी देशों की गरीब और पीड़ित जनता इस व्यवस्था को अमल में लायेगी.

प्राचीन भारत में ही वैशाली और लिच्छवी जैसे शक्तिशाली गणराज्य थे. संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वर्गीय राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र की जो परिभाषा दी है, वह दिल्ली में सही अर्थो में चरितार्थ हो रही है. अब इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करना है. इसके लिए आवश्यक है कि आम आदमी पार्टी अपना संविधान, सिद्धांत, उद्देश्य और चरित्र को जनता के बीच प्रचारित-प्रसारित करे.

गोपाल शरण वर्मा, अरसंडे, बोड़ेया

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