उत्तराखंड में इन दिनों राज्य के अस्तित्व व बेहतरी के नजरिये से दुखद सियासी माहौल पनप रहे हैं. उम्मीद थी कि राज्य में लगा राष्ट्रपति शासन जल्द ही हट जायेगा और फिर से वहां लोकतांत्रिक सरकार राज्य का नेतृत्व करेगी. ऐसा हुआ भी पर अफसोस कुछ घंटों के लिए! उच्च न्यायालय ने राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया और साथ ही साथ केंद्र सरकार को फटकार भी दी गयी़
अब सत्ता के मद में चूर नेताओं को यह कहां बर्दाश्त था कि उनके रहते विपक्षी पार्टी सत्तासीन हो़ इसलिए नेताओं को उनकी आन सुप्रीम कोर्ट तक खींच ले गयी और वहां जो नतीजा आया, वो आम जनता की आकांक्षाओं व उम्मीदों से सिफर निकला, राज्य में फिर से राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया़
उत्तराखंड के सियासी समीकरणों को देखें तो कोई भी पार्टी अपने क्षणिक मौके को भी गंवाना नहीं चाहती है़ देखना यह है कि नेताओं का स्वार्थ राज्य के साथ कितना संतुलन रख पाता है.
आदित्य शर्मा, दुमका
