मुंबई, कोलकाता, चेन्नई आदि के नाम भी बदले गये़ इसलिए हरियाणा सरकार के ताजा फैसले के बाद तमाम दस्तावेजों में पुराने नामों को बदलने संबंधी अड़चनों का तर्क बहुत दमदार नहीं कहा जा सकता़ पर सवाल है कि महज अपने वैचारिक आग्रह के चलते किसी शहर, स्थान या संस्था का नाम बदल देना और इसके चलते व्यवस्था पर करोड़ों रुपये का बोझ डाल देना कहां तक उचित है?
गुरुग्राम : नाम के पीछे
हरियाणा सरकार ने गुड़गांव का नाम बदल कर गुरुग्राम और मेवात का नूह करने को हरी झंडी दे दी़ हालांकि यह प्रस्ताव काफी समय से था, पर किन्हीं अड़चनों के चलते इस पर फैसला नहीं लिया जा पा रहा था़ यह पहली बार नहीं है, जब किसी जिले या शहर के नाम को उसके प्राचीन […]

हरियाणा सरकार ने गुड़गांव का नाम बदल कर गुरुग्राम और मेवात का नूह करने को हरी झंडी दे दी़ हालांकि यह प्रस्ताव काफी समय से था, पर किन्हीं अड़चनों के चलते इस पर फैसला नहीं लिया जा पा रहा था़ यह पहली बार नहीं है, जब किसी जिले या शहर के नाम को उसके प्राचीन साक्ष्यों के आधार पर संशोधित किया गया है़.
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