पांच वर्ष की प्रतीक्षा!

सही है कि देश ने पिछले 65 वर्षों तक खूब धैर्य रखा है, तो क्या ​देश की जनता मोदी सरकार को पांच वर्ष का समय नहीं दे ​सकती? वास्तव में यह नकारात्मकता की हद है. ​पिछले दिनों पार्टियों, मीडिया और बुद्धिजीवियों की हताशा कम, स्वार्थ ही ज्यादा दिखाई दी है. माना कि धन और बल […]

सही है कि देश ने पिछले 65 वर्षों तक खूब धैर्य रखा है, तो क्या ​देश की जनता मोदी सरकार को पांच वर्ष का समय नहीं दे ​सकती? वास्तव में यह नकारात्मकता की हद है. ​पिछले दिनों पार्टियों, मीडिया और बुद्धिजीवियों की हताशा कम, स्वार्थ ही ज्यादा दिखाई दी है.
माना कि धन और बल की प्राप्ति हेतु सभी लालायित रहते हैं, ​जो कोई बुरी बात नहीं, ​मगर इनके लिए इतना ​और इस कदर ​अंधा होना उचित नहीं है. इसीलिए ही तो इन​ सभी ​की साख को भी कुछ आंच जरूर आयी है. विरोध कोई बुरा नहीं होता, मगर ​सिर्फ विरोध के लिए विरोध कभी उचित नहीं है. इसलिए यह कई बार नीचा भी दिखा देता है. असल में किसी पार्टी के पास दूरगामी, पारदर्शी ठोस जनवादी कार्यक्रम ही नहीं हैं. सभी को ​सिर्फ ​अपने वोट बैंक ​और सत्ता ​की ही चिंता है.
वेद मामूरपुर, नरेला

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