समय बतायेगा कौन कितना विनाशकारी

आम तौर पर मौन रहनेवाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों मौन तोड़ दिया. और जब कुछ टूटता है तो विस्फोट होता है और ऐसा हुआ भी. मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि वे प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में नहीं हैं. 2014 के चुनाव के बाद वे देश की बागडोर किसी अन्य को सौंप देंगे. […]

आम तौर पर मौन रहनेवाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों मौन तोड़ दिया. और जब कुछ टूटता है तो विस्फोट होता है और ऐसा हुआ भी. मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि वे प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में नहीं हैं. 2014 के चुनाव के बाद वे देश की बागडोर किसी अन्य को सौंप देंगे. प्रधानमंत्री ने यह कह कर सचमुच विस्फोट कर दिया कि राहुल गांधी में प्रधानमंत्री बनने की अपार संभावनाएं हैं.

प्रधानमंत्री ने अगला विस्फोट किया – अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गये तो वे देश के लिए विनाशकारी सिद्ध होंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे कमजोर प्रधानमंत्री कभी नहीं रहे. उन्होंने कहा – उन्हें आज की मीडिया और आज के विपक्ष के बजाय आनेवाले इतिहासकारों के मूल्यांकन पर अधिक भरोसा है. शायद उन्हें यह पता नहीं था कि उनका मूल्यांकन तो जनता कब की कर चुकी है. इतिहासकारों को कष्ट करने की कोई आवश्यकता ही नहीं रहेगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जीवन में एक बार ही लोकसभा का चुनाव लड़ा, फिर तौबा कर ली. बिना हाथ-पांव मारे ही कुर्सी मिल जाये तो कौन अपनी फजीहत कराये! सोनियाजी ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और प्लेट में सजा कर प्रधानमंत्री का पद उनके सामने पेश कर दिया. 10 वर्षो तक इनकी नाक के नीचे घोटालों पर घोटाले होते रहे और उन्होंने अपनी आंखें मूंदे रखी.

जनता की फिक्र करने की आवश्यकता कभी नहीं की, क्योंकि जनता ने तो उन्हें कुर्सी पर बैठाया भी नहीं था. नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में विनाशकारी सिद्ध होंगे या वरदान साबित होंगे यह तो समय बतायेगा, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश को जिस विनाश के कगार पर पहुंचा दिया है, उससे वापस लाना अगले प्रधानमंत्री के लिए वास्तव में बहुत कठिन होगा.

डॉ विनय कुमार सिन्हा, रांची

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