एक -दूसरे के पूरक हैं स्त्री-पुरुष

जिस देश में स्त्री खुद को नीचा मान ले, वहां पुरुष कभी ऊंचा नहीं उठ सकता क्योंकि पुरुषों को भी जन्म स्त्री ही देती है. लेकिन स्त्रियां मन में यह बात मान चुकी हैं कि वे कहीं न कहीं पुरुषों से कुछ कम हैं. स्त्रियों को शारीरिक रूप से कमजोर समझा जाता है, कुछ हद […]

जिस देश में स्त्री खुद को नीचा मान ले, वहां पुरुष कभी ऊंचा नहीं उठ सकता क्योंकि पुरुषों को भी जन्म स्त्री ही देती है. लेकिन स्त्रियां मन में यह बात मान चुकी हैं कि वे कहीं न कहीं पुरुषों से कुछ कम हैं. स्त्रियों को शारीरिक रूप से कमजोर समझा जाता है, कुछ हद तक यह सच भी है. लेकिन वे इस मामले में पुरुषों से ज्यादा ताकतवर होती हैं कि उनमें प्रतिरोध की क्षमता पुरुषों से ज्यादा होती है.

यह शक्ति प्रकृति ने ही स्त्रियों को दी है, क्योंकि उसे नौ महीने तक बच्चे को पेट में रखने से लेकर प्रसव की जो पीड़ा सहनी पड़ती है, अगर एक पुरुष को यह करना पड़े तो वह जिंदा रहने से इनकार कर दे. पुरुषों के पास क्षमता होती है गणित की, विचार की, तर्क की, पर स्त्री के पास क्षमता होती है प्रेम की, हृदय की, भाव की. कहना मुश्किल है कि श्रेष्ठ कौन है, दरअसल दोनों एक-दूसरे के परिपूरक है.

श्वेता कुमारी, धरमबहाल, घाटशिला

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