देश की छवि हो रही धूमिल

जिन्हें समाज का मार्गदर्शक बनना था, आज वही भ्रष्ट होते जा रहे हैं. धर्म, अध्यात्म एवं उच्च पदों पर बैठे कई लोग अनैतिक कार्यो में शामिल हो रहे हैं. इस कारण हमारे देश की छवि धूमिल होती जा रही है. लगातार समाज में अनैतिक कार्य बढ़ने से युवा शक्ति व हमारी महान संस्कृति और समाज […]

जिन्हें समाज का मार्गदर्शक बनना था, आज वही भ्रष्ट होते जा रहे हैं. धर्म, अध्यात्म एवं उच्च पदों पर बैठे कई लोग अनैतिक कार्यो में शामिल हो रहे हैं. इस कारण हमारे देश की छवि धूमिल होती जा रही है.

लगातार समाज में अनैतिक कार्य बढ़ने से युवा शक्ति व हमारी महान संस्कृति और समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. देश जैसे-जैसे उन्नति कर रहा है, वैसे-वैसे लोग अपनी राह से भटक रहे हैं. इन सबसे हमारे समाज, संस्कृति और सभ्यता को गहरा आघात लग रहा है.

जिस भूमि पर रामकृष्ण, हरिश्चंद्र, बलि, चाणक्य, मीरा, अनुसूइया, शंकराचार्य, चंद्रगुप्त, विक्र मादित्य, महाराणा प्रताप आदि महान लोगों ने जन्म लेकर हमें उपकृत किया है, आज उसी भूमि पर भ्रष्टाचार, अनाचार की घटनाएं हो रही हैं. इसने सामाजिक, सांस्कृतिक व चारित्रिक पतन की इबारत लिखनी शुरू कर दी है.

सूरजभान सिंह, गोमिया, बोकारो

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