गैस मूल्य वृद्धि में घोटाला तो नहीं?

यूपीए सरकार द्वारा संचालित एलपीजी सब्सिडी नकद हस्तांतरण योजना गरीब एवं मध्यवर्गीय जनता के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है. गैस डिलीवरी के बाद भी उचित समय पर उसकी सब्सिडी उपभोक्ता के खाते में नहीं आ पाती है, जिसके लिए बार-बार गैस वितरक एजेंसी के पास विनती करनी पड़ती है. बगैर सब्सिडी वाली गैस […]

यूपीए सरकार द्वारा संचालित एलपीजी सब्सिडी नकद हस्तांतरण योजना गरीब एवं मध्यवर्गीय जनता के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है. गैस डिलीवरी के बाद भी उचित समय पर उसकी सब्सिडी उपभोक्ता के खाते में नहीं आ पाती है, जिसके लिए बार-बार गैस वितरक एजेंसी के पास विनती करनी पड़ती है.

बगैर सब्सिडी वाली गैस के दामों में लगातार वृद्धि गैस कंपनियों की खुली तौर पर मनमानी है. सरकार द्वारा भी इस मामले में लापरवाही व गैस की मूल्यवृद्धि पर मौन सहमति प्रतीत होती है. इसलिए इससे जुड़ी शिकायतों की पारदर्शी तरीके से जांच करायी जाये.

ताकि यह पता चल सके कि वाकई में इस मूल्यवृद्धि की वजह कंपनियों को हो रहा नुकसान है या फिर यह गैस सब्सिडी घोटाले की ओर संकेत कर रहा है. कुल मिला कर यह जनता पर महंगाई की चौतरफा मार का एक पहलू है.

रवि रंजन, हरमू, रांची

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