एक लाख से ज्यादा लोग पहुंचे, 15 करोड़ से अधिक खर्च (प्रभात खबर, 30/12/13). सटीक सवाल किया है आपने. मेरी गणित बहुत कमजोर है, इसलिए मैं यह नहीं बता सकता कि एक व्यक्ति पर कितना खर्च आया होगा, इसका जवाब फिलहाल आप पर ही छोड़ता हूं. मैं सेठ-साहूकार तो हूं नहीं इसलिए नफा-नुकसान के हिसाब-किताब से भी अनभिज्ञ हूं.
मैंने अपने घर में टीवी पर जो-जो सुना और देखा उस पर आपके माध्यम से कुछ कहना चाहता हूं. माननीय मोदी जी ने हम झारखंडवासियों को बताया कि 10 वर्ष में कोई राज्य विकास की नयी ऊंचाई पार कर लेता है, लेकिन झारखंड वह मौका खो चुका है. क्योंकि यह राज्य अब 13 साल का हो गया है. अब मोदी जी को यह कौन बताये कि इन 13 वर्षो मे 8 वर्ष से अधिक समय तक राज्य की बागडोर भारतीय जनता पार्टी के हाथों में थी.
उस समय विकास की अनदेखी के लिए जिम्मेदार भाजपा को पाक-साफ बता कर मोदी जी ने यह साफ कर दिया कि अन्य पार्टिर्यो की तरह ही भाजपा का भी नजरिया है. बची-खुची कसर राजनाथ सिंह जी ने अपने उद्गार में पूरी कर दी. उन्होंने कहाकि झारखंड में सीएम (मुख्य मंत्री) के ऊपर एक सुपर सीएम होता है, लेकिन वह बड़ी चालाकी से यह बात निगल गये कि भाजपा के शासनकाल में उनकी ओर से कौन-कौन सुपर सीएम हुए.
यह भाजपा के लोगों की कलाकारी है. ऐसे भी ये लोग आला दरजे के कलाकार हैं. एक बात और, मोदी जी ने देश में जहां भी भाषण दिया, वहां गुजरात मॉडल की चर्चा जरूर की, लेकिन गुजरात में लागू न्यनतम मजदूरी पर बिल्कुल खामोश रहे. गुजरात मे उद्योगपतियों को सस्ती दर पर दी गयी जमीन और श्रम कानून तथा बिजली में दी गयी छूट पर मोदी जी को बोलने की मनाही है.
गणोश सीटू, ई-मेल से
