बच्चों की निराली दुनिया की बात मैं ज्यूरिख से लिख रहा हूं. कुछ जानने की इच्छा के लिए कोई उम्र सीमा नहीं होती, मगर बच्चों में यह जिज्ञासा कुछ ज्यादा होती है. जानकारियों के लिए बड़े-बुजुर्गो के अलावा पास-पड़ोस और मीडिया अच्छे साधनों में से हैं. मेरी जन्मभूमि रांची है. मैं झारखंडी हूं. मेरे गांव व देश की खबरें अखबारों से, खास कर प्रभात खबर ई-पेपर से मिलती हैं.
अखबारों में, आये दिन होनेवाले शहर बंद, चक्का जाम वगैरह की वजह से अपने शहर के स्कूली बच्चों की त्रसदी की खबरें भरी रहती हैं. भीड़ मे फंसे बच्चे, बेहाल माता-पिता जैसी खबरें रहती हैं. इन बातों पर हाय-तौबा मचाना अच्छी बात है, मगर उससे भी अच्छा है इनका समाधान ढूंढ़ना. मैं भी एक छात्र हूं. अपने हमउम्र बच्चों की पीड़ा देख मन में सवाल आता है कि बच्चों से यह अन्याय क्यों?
त्रियान भारद्वाज, ज्यूरिख, स्विटजरलैंड
