सीखने की जरूरत

पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका से लौटते वक्त सउदी अरब में रुके़ वहां उन्होंने रियाद में आइटी कंपनी टीसीएस के एक केंद्र का दौरा किया़ यह जानकर काफी आश्चर्य हुआ कि रियाद की टीसीएस केंद्र को पूर्ण रूप से महिलाओं के द्वारा संचालित किया जाता है, जबकि ज्यादातर लोग यहजानते हैं कि इसलामिक देशों […]

पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका से लौटते वक्त सउदी अरब में रुके़ वहां उन्होंने रियाद में आइटी कंपनी टीसीएस के एक केंद्र का दौरा किया़ यह जानकर काफी आश्चर्य हुआ कि रियाद की टीसीएस केंद्र को पूर्ण रूप से महिलाओं के द्वारा संचालित किया जाता है, जबकि ज्यादातर लोग यहजानते हैं कि इसलामिक देशों में महिलाएं प्रतिबंधित जिंदगी जीने के लिए विवश होती हैं.
यह समाचार हमें यह सोचने को मजबूर करता है कि भारत में जहां नारी की पूजा की मान्यता है, वहां दिन-प्रतिदिन दुष्कर्म व महिला उत्पीड़न के समाचार आते हैं. इसके विपरीत जिस देश की महिलाएं प्रतिबंधित जिंदगी जीने के लिए विवश हैं, वहां की महिलाएं देश के विकास की नयी गाथा गढ़ रही हैं. क्या हमारे देश और समाज को इससे कुछ सीखने की जरूरत नहीं है?
मृणाल कांति रक्षित, रांची

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