‘भारत माता की जय’ पर हो रहा बवाल देख कर दुःख होता है. भारत माता अर्थात अपनी धरती माता, जिस पर हम सब जन्मे, पले और बढ़े हैं. जो अनेक प्राकृतिक देन से विश्व में अनोखी और निराली है, उसका सम्मान करना हम सभी का नैतिक दायित्व है. उसके सम्मान का सही अर्थ लोग शायद आज भी भूले हुए हैं. इसलिए ही तो यह प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है.
महज जय बोलने से कुछ नहीं होता. इसका सही सम्मान तो इसकी प्राकृतिक संपदा संपन्नता और सुचिता को सही से कायम रखना ही है. किसी से जोर-जबरदस्ती जय बोलने के लिए कहना और ऐसा न करने पर उसके हाथ-पैर ही तोड़ देना, अपनी मां को रुलानेवाली दुखद घटना है, जो कभी उचित नहीं हो सकती. ऐसी बातों से ही तो इसकी आत्मा कमजोर होती है. इसलिए हम सभी को मिल कर इसे उसकी इच्छानुसार इसे मजबूत बनना ही होगा.
वेद मामूरपुर, नरेला, खिदिरपुर
