प्रधानमंत्री की सऊदी यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो-दिवसीय सऊदी यात्रा आतंकवाद पर अंकुश लगाने तथा आर्थिक संबंध मजबूत करने की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है. खाड़ी देशों में तकरीबन 80 लाख भारतीय कार्यरत हैं. इनमें से 30 लाख से अधिक लोग सिर्फ सऊदी अरब में हैं. तेल की कीमतें गिरने और मध्य-पूर्व में अशांति से खाड़ी देशों की […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो-दिवसीय सऊदी यात्रा आतंकवाद पर अंकुश लगाने तथा आर्थिक संबंध मजबूत करने की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है. खाड़ी देशों में तकरीबन 80 लाख भारतीय कार्यरत हैं. इनमें से 30 लाख से अधिक लोग सिर्फ सऊदी अरब में हैं. तेल की कीमतें गिरने और मध्य-पूर्व में अशांति से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव का माहौल है. आगामी दिनों में इसका असर भारतीय कामगारों पर पड़ सकता है.

मोदी पहले संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा कर चुके हैं तथा कुछ अरब नेताओं ने पिछले दिनों भारत का दौरा भी किया है. जानकारों का कहना है कि अरब में भारत के आर्थिक हितों के साथ आतंकवाद के विरुद्ध साझेदारी के मद्देनजर भी यह यात्रा उल्लेखनीय है, क्योंकि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश पाकिस्तान के भी काफी निकट हैं. इस यात्रा से पहले सऊदी अरब और अमेरिका ने पाकिस्तान से संचालित आतंकी गिरोह लश्कर-ए-तैयबा, तालिबान और अल-कायदा से जुड़े चार लोगों के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा की है.

वर्ष 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सऊदी यात्रा के बाद आतंक को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग की शुरुआत हुई थी. पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब ने आतंकी घटनाओं में शामिल होने के आरोपी चार लोगों को भारत के हवाले किया है. इसलामिक स्टेट से जुड़ी भारत की चिंता को देखते हुए भी इस यात्रा का बड़ा महत्व है. क्योंकि, सीरिया और इराक में पीछे हटते इस संगठन के लड़ाके दक्षिण एशिया में नया ठिकाना बना सकते हैं. भारत में आयातित तेल का 20 फीसदी हिस्सा सऊदी अरब से आता है.

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों में यह समझ बनी है कि क्रेता-विक्रेता के मौजूदा संबंध से आगे बढ़ते हुए ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रमों को स्थापित करने की कोशिश की जाये. मोदी ने सऊदी व्यापारियों को भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान करते हुए अनुकूल नियमन का भरोसा भी दिया है. अगले पांच वर्षों में सऊदी अरब का इरादा भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक ट्रिलियन डॉलर निवेश करने का है. उम्मीद है कि इसमें भारतीय कंपनियों की भी समुचित भागीदारी होगी. मध्य-पूर्व की राजनीति में ईरान और सीरिया से भारत के अच्छे संबंध हैं, किंतु इन देशों से सऊदी अरब के रिश्ते तनावपूर्ण हैं. इस दृष्टि से सऊदी अरब से द्विपक्षीय संबंधों की प्रगाढ़ता भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है. स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम सुधार आदि विषयों पर चर्चा भी इस यात्रा की विशेषता है.

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