इंटरनेट पर नये मौके

पहले मोबाइल और फिर इंटरनेट ने आम लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया. ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, जब लोग इंटरनेट का लाभ उठाने के लिए कैफे की तलाश में भटकते थे. लेकिन, बीते कुछ वर्षों में स्मार्टफोन के जरिये इंटरनेट तक आसान पहुंच ने संपर्क और संचार के तौर-तरीके एकदम से बदल दिये. […]

पहले मोबाइल और फिर इंटरनेट ने आम लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया. ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, जब लोग इंटरनेट का लाभ उठाने के लिए कैफे की तलाश में भटकते थे. लेकिन, बीते कुछ वर्षों में स्मार्टफोन के जरिये इंटरनेट तक आसान पहुंच ने संपर्क और संचार के तौर-तरीके एकदम से बदल दिये. स्मार्टफोन के प्रसार के साथ अब व्हॉट्सएप्प, फेसबुक और स्काइप जैसी इंटरनेट आधारित संचार सेवाएं गांव-कस्बों तक में लोकप्रिय हो चुकी हैं.
गूगल का अनुमान है कि 2017 तक भारत में इंटरनेट का उपयोग करनेवालों की संख्या 50 करोड़ हो जायेगी, जिनमें करीब 40 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल मोबाइल फोन के जरिये कर रहे होंगे. ऐसे में ‘वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल’ से संबंधित नीति को टेलीकॉम कमीशन की मंजूरी मिलना स्मार्टफोन धारकों के लिए अच्छी खबर है. वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल ऐसी तकनीक है, जिससे आप स्मार्टफोन में इंटरनेट पैक एक्टिव रहने पर मेन बैलेंस नहीं होने पर भी कॉल कर सकेंगे. इससे कॉल और डेटा के क्षेत्र में वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर्स को भी मौके मिलेंगे.
विदेशी कंपनियां भी मौजूदा टेलीकॉम ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी कर सेवाएं लांच कर सकेंगी. हालांकि इसका पूरा लाभ उठाने के लिए इंटरनेट सेवाओं की पूरे देश में निर्बाध गति भी जरूरी है. हाल में जारी ‘स्टेट ऑफ द इंटरनेट’ रिपोर्ट के मुताबिक एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत में इंटरनेट की औसत कनेक्शन स्पीड सबसे कम है और इस मामले में भारत की दुनिया में रैंक 114 है. इस स्थिति में सुधार के बिना महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘डिजिटल इंडिया’ की राह आसान नहीं है.
टेलीकॉम कमीशन ने आपातकालीन सेवाओं के लिए कॉमन नंबर ‘112’ शुरू करने को भी मंजूरी दी है. इस समय भारत में पुलिस सहायता के लिए 100, फायर ब्रिगेड के लिए 101, एंबुलेंस के लिए 102, आपदा प्रबंधन के लिए 108 आदि नंबर चलन में हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर नंबर बहुत कम लोगों को याद रहते हैं.
ऐसे में सभी आपात स्थिति में एक ही टॉल फ्री नंबर संकटमोचक की तरह हो सकता है, यदि इसे कारगर तरीके से अमल में लाया जाये. ऐसा न हो कि 112 पर कॉल करनेवाला व्यक्ति विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के चलते कार्रवाई का इंतजार ही न करता रह जाये.

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