स्वार्थ की राजनीति

आजकल हमारे देश में छोटे मुद्दे को भी राजनीतिक रंग दिया जा रहा है़ इससे हमारी राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल खड़ा हो रहा है. चाहे कोई भी घटना घटे, राजनेता उसमें अपना स्वार्थ साधने लगते हैं. अच्छा होता हमारे नेता बयानों की लड़ाई छोड़ कर नीतियों के लिए लड़ाई करते, जिससे जनता का भला होता़ […]

आजकल हमारे देश में छोटे मुद्दे को भी राजनीतिक रंग दिया जा रहा है़ इससे हमारी राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल खड़ा हो रहा है. चाहे कोई भी घटना घटे, राजनेता उसमें अपना स्वार्थ साधने लगते हैं.

अच्छा होता हमारे नेता बयानों की लड़ाई छोड़ कर नीतियों के लिए लड़ाई करते, जिससे जनता का भला होता़ नकारात्मक बयानबाजी कर सुर्खियों में आना नेताओं का फैशन हो गया है़ राजनीति करने का दृष्टिकोण बदल गया है, जिससे राजनीति व्यक्तिगत स्वार्थ का एक हिस्सा बन चुकी है़ इन सब कारणों से हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है़

सुमित कु बड़ाईक, ई-मेल से

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