चौराहों पर स्त्री प्रतिमाएं भी लगें

समाज के विकास में महिलाओं ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पुरुषों के बराबर योगदान दिया है, लेकिन चौक-चौराहों पर स्त्री प्रतिमा कहीं नजर नहीं आती़ समाज के विकास में किन-किन महिलाओं का योगदान रहा है, यह शोध किया जाये़ पुरुषों की मूर्तियां तो हर चौराहे पर हैं, अब स्त्री प्रतिमाओं को चौराहों पर स्थापित […]

समाज के विकास में महिलाओं ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पुरुषों के बराबर योगदान दिया है, लेकिन चौक-चौराहों पर स्त्री प्रतिमा कहीं नजर नहीं आती़ समाज के विकास में किन-किन महिलाओं का योगदान रहा है, यह शोध किया जाये़ पुरुषों की मूर्तियां तो हर चौराहे पर हैं, अब स्त्री प्रतिमाओं को चौराहों पर स्थापित करने पर विचार किया जाये़
स्त्री के मातृत्व को पर्याप्त महिमामंडित किया जा चुका है, इसलिए ध्यान रहे कि स्त्री प्रतिमाओं में वे ही गुण झलकें, जो पुरुष प्रतिमाओं में दिखते हैं. पुरुष के लिए घोड़ा और स्त्री के लिए घड़ा वाला जमाना अब नहीं चलेगा. हम उस दिन के इंतजार में हैं, जब किसी दिवंगत महिला की मूर्ति शहर के किसी प्रमुख चौक पर दिखेगी़
डॉ उषा किरण, रांची

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