होली में अहंकार को जलायें

साल भर के अंतराल के बाद वह दिन आ ही गया, जब लोग अपने समूचे समाज के साथ इकठ्ठे होकर बुराई पर अच्छाई की जीत को साकार करते हुए पाप व नफरत की प्रतीक होलिका के पुतले का दहन करते हैं. और ठीक होलिका दहन की भांति अपने समाज से अन्याय, भ्रष्टाचार व तमाम कुरीतियां […]

साल भर के अंतराल के बाद वह दिन आ ही गया, जब लोग अपने समूचे समाज के साथ इकठ्ठे होकर बुराई पर अच्छाई की जीत को साकार करते हुए पाप व नफरत की प्रतीक होलिका के पुतले का दहन करते हैं. और ठीक होलिका दहन की भांति अपने समाज से अन्याय, भ्रष्टाचार व तमाम कुरीतियां व बुरी अवधारणाओं को जला देने का प्रण लेते हैं.
होलिका के पुतले को धूं-धुं कर जलता देख कई लोगों को यह एहसास होता है कि अहंकारी मानसिकता से ग्रस्त व्यक्ति का दर्दनाक अंत निश्चित है़ लेकिन बावजूद इसके, बस कुछ को छोड़ कर, न तो किसी की मानसिकता में कोई खास बदलाव आता है और न ही उनके आचार-व्यवहार में. हमें इस बार होलिका दहन में लोगों के अवचेतन मन में बसे अहंकार को मिटाना ही होगा. यही इस दिवस की सार्थकता होगी.
आदित्य शर्मा, दुमका

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