बालूमाथ में दो अल्पसंख्यक युवकों की हत्या कर दी गयी़ यह हत्या अापराधिक प्रवृत्ति की थी या सांप्रदायिक, इसे तो अदालत तय करेगी और कानून के अनुसार सजा देगी, लेकिन इस घटना पर नेताओं के बयान आने लगे हैं.
जितने राजनीतिक दल घटनास्थल का दौरा करने गये, वे बस अपने घड़ियाली आंसू बहा कर और उक्त घटना को सांप्रदायिक रंग दे कर निकल लिये़ और छोड़ गये वो नफरत के बीज, जिनसे उनकी राजनीति की फसल लहलहाती है़ क्यों न अगले चुनावों में मौत पर राजनीति करनेवाले ऐसे नेताओं की जमानत जब्त करा दे जनता, ताकि फिर किसी की मौत पर राजनीति करने की इनकी हिम्मत न हो!
विकास कुमार, ई-मेल से
