एक उचित निर्णय

भारत सरकार ने 344 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाईयों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनमें अनेक एंटीबायोटिक और दर्द-निवारक भी हैं. इस तरह की दवाइयां दो या अधिक दवाईयों के निर्धारित मात्रा में मिश्रण से तैयार की जाती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दवाइयों का उपचार में सहायक होने का कोई आधार नहीं पाया गया […]

भारत सरकार ने 344 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाईयों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनमें अनेक एंटीबायोटिक और दर्द-निवारक भी हैं. इस तरह की दवाइयां दो या अधिक दवाईयों के निर्धारित मात्रा में मिश्रण से तैयार की जाती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दवाइयों का उपचार में सहायक होने का कोई आधार नहीं पाया गया है. इस निर्णय से कई लोकप्रिय दवाइयां चलन से बाहर हो जायेंगी, लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह जरूरी फैसला है. चूंकि ऐसी दवाइयां आम तौर पर बिना चिकित्सकीय सलाह और निगरानी के ली जाती हैं, इसलिए इनके सकारात्मक और नकारात्मक असर का आकलन करना संभव नहीं होता है.

विशेषज्ञ लंबे समय से ऐसी दवाइयों पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं, क्योंकि इनका मिश्रण किसी वैज्ञानिक या वैधानिक सूत्रों पर आधारित नहीं होता है. जानकारी के अभाव में इनके सेवन से रोगी की समस्या बिगड़ सकती है. भारत में प्रचलित अधिकांश एफडीसी दवाइयां अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य विकसित देशों में बहुत पहले से प्रतिबंधित हैं, जबकि उन्हीं देशों की कंपनियां भारत समेत दुनिया के विभिन्न देशों में इन्हें बेचती हैं.

इनका प्रचलन तीन दशकों से अधिक समय से है. माना जा रहा है कि आनेवाले दिनों में अन्य कई ऐसी दवाओं पर रोक की घोषणा हो सकती है. इस श्रेणी की करीब एक हजार दवाओं पर रोक लगायी जा सकती है. हमारे देश में कानूनों को ताक पर रख कर बिना किसी चिकित्सक की सलाह के दवाएं बेचने की समस्या पहले से ही गंभीर है. इसके अलावा किसी अन्य रोगी को दी जानेवाली दवा को उसी रोग से पीड़ित दूसरा व्यक्ति भी बिना सोचे-समझे ले लेता है. ऐसे में नियमों को समुचित तरीके से लागू कराना लोगों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है.

चिकित्सक की निगरानी के बिना ली गयी दवाइयों में प्रयुक्त रसायन बहुत समय बाद भी परेशानी का कारण बन सकते हैं. अनियंत्रित ढंग से ली जानेवाली एंटीबायोटिक और दर्द-निवारक दवाएं हमारी प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती हैं और अनेक खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकती हैं. आशा है कि सरकार, समाज और दवा कारोबारी इस निर्णय को सही ढंग से लागू कराने के लिए प्रयासरत होंगे.

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