शिक्षा और जागरूकता से महिलाएं होंगी सशक्त

आज विश्व महिला दिवस है. समूचा विश्व महिलाओं की सशक्ति हेतु एक बार फिर संकल्पित होनेवाला है. देवी का रूप मानी जानेवाली महिलाएं इस दिन अपने वर्ग को जागरूक व सशक्त करने के प्रयास में होंगी. भारत में भी महिला दिवस व्यापक तौर पर मनाये जाने की आशा है, ताकि भारतीय महिलाओं को अपने प्रति […]

आज विश्व महिला दिवस है. समूचा विश्व महिलाओं की सशक्ति हेतु एक बार फिर संकल्पित होनेवाला है. देवी का रूप मानी जानेवाली महिलाएं इस दिन अपने वर्ग को जागरूक व सशक्त करने के प्रयास में होंगी. भारत में भी महिला दिवस व्यापक तौर पर मनाये जाने की आशा है, ताकि भारतीय महिलाओं को अपने प्रति विश्वास की प्राप्ति हो सके या यूं कहें कि की आवाज बुलंद हो सके.
भारत में महिलाओं की सामाजिक व पारिवारिक स्थिति शुरू से ही डावांडोल रही है. प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में उन्हें उनके सम्मान व अधिकारों से महरूम रखा गया है. हमेशा से ही उन्हें समाज में दोयम दर्जे का स्थान ही प्राप्त है.
जब-जब वे अपने ऊपर होनेवाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठातीं हैं, परिवार व समाज के लोग महिला होने की दुहाई देकर चुप करा देते हैं. उन्हें कहा जाता है कि उनके पतियों द्वारा किये जानेवाले उत्पीड़न को सह कर भी उनकी सेवा करना ही पत्नी धर्म है. महिलाओं को इस दमघोंटू स्थिति से मुक्त कराने के लिए उन्हें जागरूक व शिक्षित करना अत्यंत आवश्यक हैं.
आदित्य शर्मा, दुमका

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