पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने अफजल गुरु के संसद भवन के हमले में शामिल होने पर शंका व्यक्त कर उसकी फांसी के निर्णय को गलत बताया था़ इस कारण भड़की आग ठंडी होने से पहले ही पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा है कि चिदंबरम ने ही लश्कर-ए-तैयबा की आतंकवादी इशरत जहां की छिपाने के लिए यूपीए सरकार के प्रतिज्ञापत्र में बदलाव किये थे़
इन दोनों घटनाओं से यही साबित होता है कि अपने वोट बैंक को कायम रखने के लिए कांग्रेस क्या कुछ नहीं कर सकती़ अगर उपरोक्त बातें सही हैं, यह कांग्रेस ही नहीं, पूरे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है़
जयेश राणे, मुंबई
