खेती छोड़ने को मजबूर होते किसान

मैं अखबार के माध्यम से राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी अवगत कराना चाहता हूं कि आज भी भारतीय किसानों के साथ अधिकतर अवसरों पर नाइंसाफी हो रही है. भारतीय किसान आत्महत्या करने को आज भी विवश हैं. इसके पीछे कई सारी वजहें हैं. अगर कोई किसान जी-जान लगा कर कुछ फसल उगा […]

मैं अखबार के माध्यम से राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी अवगत कराना चाहता हूं कि आज भी भारतीय किसानों के साथ अधिकतर अवसरों पर नाइंसाफी हो रही है. भारतीय किसान आत्महत्या करने को आज भी विवश हैं. इसके पीछे कई सारी वजहें हैं.
अगर कोई किसान जी-जान लगा कर कुछ फसल उगा लेता है, तो उसके पीछे साहूकार से लेकर व्यापारी वर्ग तक लगा रहता है. आज की दशा यह है कि किसान मजदूरी करना पसंद करता है, लेकिन किसानी करना नहीं, क्योंकि आज भी किसानों को बिचौलियों के आगे दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं.
अगर किसी को इस पर विश्वास नहीं है, तो आज भी आप उन मेहनतकश किसानों से पूछ सकते हैं. अंत में यही कहना चाहता हूं कि सरकार इस तरह के बिचौलियों से किसानों को बचाये अन्यथा वह समय दूर नहीं जब सारे के सारे किसान ही किसानी छोड़ दें.
-जयदेव कुशवाहा, ई-मेल से

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