।। मिथिलेश झा।।
(प्रभात खबर, रांची)
हमारे एक मित्र हैं, राजकुमार. कोई भी काम हो, कभी ना नहीं करते. उनसे काम होगा, इसकी गारंटी भी नहीं देते. अपनी बात मनवाने में भी एक्सपर्ट हैं. जी करता है कि उनका नाम नरेंद्र मोदी रख दें. लेकिन, अब विचार बदल रहा है. वैसे ही, जैसे नरेंद्र मोदी के बारे में कांग्रेस और यूपीए सरकार के विचार बदल रहे हैं. दरअसल, अब नरेंद्र मोदी को सत्ताधारी दल भी गंभीरता से लेने लगा है. कोई और कहता, तो मैं इसे दरकिनार कर देता, लेकिन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह यह बात कर रहे हैं. जी हां, पीएम भी उन्हें गंभीरता से लेने लगे हैं.
इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि नरेंद्र मोदी आम चुनाव में कांग्रेस के समक्ष चुनौती हैं, तो पार्टी के प्रवक्ताओं ने उनके बयान का जम कर विरोध किया. कहने लगे कि मोदी भाजपा की सरकार क्या बनायेंगे, उल्टे पार्टी की लुटिया डुबो देंगे. एक दौर था, जब दिग्विजय सिंह मोदी का मजाक उड़ाने का कोई मौका नहीं चूकते थे. नाम दिया था, फेंकू. कांग्रेस के नेता और मंत्री बार-बार नरेंद्र मोदी को ताने देते कि अमेरिका उन्हें वीजा नहीं देता. मानो अमेरिका जाना प्रधानमंत्री बनने की गारंटी हो. अरे भाई, वह जमाना चला गया, जब जेल जानेवाला बड़ा नेता बनता था. अब तो दो साल से अधिक जेल में रहे, तो नेता बनना तो दूर, नेता बनने का सपना भी नहीं देख सकेंगे.
और मनमोहन सिंह ने बार-बार अमेरिका की यात्रा करके क्या तीर मार लिया? वहां गये और वहां की मुसीबत अपने देश के लोगों पर थोप दी. जी, मंदी अमेरिका में आयी, चिंतित पीएम हुए और वहां से वह मंदी ले आये. अमेरिका की मंदी तो खत्म हो गयी, हमारा चालू खाता घाटा बढ़ने लगा. महंगाई बढ़ने लगी. खैर, इन सब पर किसी बहस की जरूरत नहीं. यदि आपके अंदर दम हो, तो हर कोई आपका लोहा मानेगा. इसे साबित कर दिया है नरेंद्र मोदी ने. कल तक जो दिग्विजय सिंह उन्हें फेकू कहते थे, अब उन्हें भी मोदी में प्रधानमंत्री बनने की क्षमता दिखने लगी है.
मोदी में दिग्गी राजा को अटल बिहारी वाजपेयी की झलक दिख रही है. कल तक जो बात सिर्फ भाजपा कहती थी, अब देश की सत्ताधारी पार्टी के बड़े-बड़े नेता और प्रधानमंत्री कह रहे हैं. कल तक सब कहते थे कि मोदी किसी भी तरह सर्वमान्य नेता नहीं बन सकते. गुजरात की राजनीति करना अलग है, दिल्ली की राजनीति अलग. उन्हें केंद्रीय राजनीति में उनकी ही पार्टी के लोग स्वीकार नहीं करेंगे. देश की जनता में उनकी स्वीकार्यता तो दूर की बात है. लेकिन, एक साल से भी कम समय में नरेंद्र मोदी ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों को संबोधित किया. बड़ी-बड़ी रैलियां कीं. पहली बार रैली में उन्हें सुननेवालों को टिकट लेना पड़ा. फिर भी भीड़ जुटी. जम्मू-कश्मीर में लगा कि भाजपा का कोई अस्तित्व है. सच है, यदि आपके अंदर दम है, तो दुनिया आपका लोहा मानेगी.
