गाजियाबाद की सीबीआइ अदालत द्वारा आरु षि-हेमराज हत्याकांड पर फैसला सुनाने से लेकर सजा के एलान तक ऐसा लगा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एक समानांतर अदालत चला रहा है. हर चैनल पर कुछ लोग अपनी राय ऐसे दे रहे थे, मानो उन्हें सब कुछ मालूम था और वही देश के सबसे भरोसेमंद इनसान हैं. यह सवाल बार-बार उठाया गया कि बेटी का कत्ल मां-बाप कैसे कर सकते हैं?
लेकिन हेमराज की हत्या और उसके परिवार की माली हालत पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने कोई सुधि नहीं ली. कृष्णा और राजकुमार के बयान लेने के लिए उन पर जो जुल्म ढाये गये, उसकी परवाह भी नहीं की गयी. डॉक्टर दंपती को अपने किये की सजा तो मिली, पर हेमराज के घरवालों का गुजारा कैसे चलेगा, इस बाबत भी कुछ कदम उठाये जाते, तो कितना अच्छा होता! देश के नेताओं और मीडिया, दोनों को इन विषयों पर सोचना चाहिए.
शाजिया खान, ई-मेल से
