विशेष राज्य के दर्जे की मांग सही

12 वर्षो से हम विकास के ख्वाब संजोते रह गये, पर वह ख्वाब हकीकत न बन सका. विशेष राज्य के दर्जे की मांग से एक बार फिर उन विकास रूपी धूमिल पड़ती उम्मीदों में एक आस जगी है. हम जंगल और कृषि पर निर्भर समाज हैं और हमने दशकों से विकास के नाम पर यातनाएं […]

12 वर्षो से हम विकास के ख्वाब संजोते रह गये, पर वह ख्वाब हकीकत न बन सका. विशेष राज्य के दर्जे की मांग से एक बार फिर उन विकास रूपी धूमिल पड़ती उम्मीदों में एक आस जगी है. हम जंगल और कृषि पर निर्भर समाज हैं और हमने दशकों से विकास के नाम पर यातनाएं झेली हैं. खनिज और वन संपदा से परिपूर्ण राज्य होते हुए भी हमारा राज्य विकास के सभी क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है.

आज भी राजनीतिक पार्टियां निजी हितों को ध्यान में रख कर ही कोई कदम उठाती हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि वे विधायक और सांसद भी बनते हैं तो जनता को भ्रमित करने और लूटने के लिए. जिस दिन हमारे राजनेता यह समङोंगे कि राजनीति केवल विधायक, सांसद या मंत्री बनने का साधन भर नहीं है, बल्कि यह तो लोगों के समस्याओं के लिए लड़ने का एक जोरदार मंच है, तो हालात बदल जायेंगे. मो शमशाद आलम, रोमी, हजारीबाग

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