हमारे देश की राजनीति धर्म और प्याज से बहुत प्रभावित है. इनके प्रभाव से राज्यों में तख्ता पलट भी हो चुका है. यही वजह है मुहावरों से उठ कर राजनीतिक पैठ बनाने की कोशिश में प्याज भी भाव खा रहा है, तो खाये! टीवी चैनलोंपर एक से एक जुमले पढ़े जा रहे हैं.
ऐसा क्या हो गया कि देश में हंगामा बरपा है. चार सौ रुपये किलो देशी घी ने रसोई से चुपड़ी गायब कर दी. मांसाहार की कीमतें शायद आसमान से भी ऊपर हैं. कोई स्टोरी नहीं बनती. फिर प्याज ने क्या गुनाह कर दिया हम आसमान सिर पर उठाये घूम रहे हैं! हमारे देश में मानसून बिगड़ा तो बहुत कुछ बिगड़ गया. दालों की कीमतें बढ़ेंगी, तैल महंगे होंगे, डीए बढ़ेगा, राजनीति होगी, शायद संसद भी ठप हो जाये, क्योंकि प्याज महंगा है. राजनीति वाले भैया! पैदावार बढ़ाने में देश की कुछ मदद कर देते तो आपका बड़ा उपकार होता.
एमके मिश्र, रांची
