झारखंड में सरकार को समर्थन दे रहे तीन निर्दलीय विधायक बोर्ड-निगम के अध्यक्ष बन गये हैं. लंबे अंतराल के बाद बोर्ड-निगम के अध्यक्ष पद पर विधायकों को बिठाने का सिलसिला शुरू हुआ है. परंपरा के मुताबिक यह पद एडजेस्टमेंट वाला है.
मतलब, अपने चहेतों या सरकार बचाने वालों को खुश करने, तुष्ट करने का सिद्ध हथियार है. चमरा लिंडा, विदेश सिंह और गीता कोड़ा को भी इसी राजनीतिक सोच के तहत पद दिया गया है. यह सब बातें अपनी जगह, पर ये विधायक चाहें तो अपने काम से अपने-अपने निगम या बोर्ड की सूरत बदल सकते हैं. विधायक चमरा लिंडा को टीवीएनएल का अध्यक्ष बनाया गया है. टीवीएनएल झारखंड में बिजली उत्पादन करनेवाला महत्वपूर्ण निगम है. लेकिन आज इसकी हालत खराब है.
यहां कार्य संस्कृति में सुधार कर इसकी स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है. इसी तरह झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (आयडा) को बदलने का काम विदेश सिंह और गीता कोड़ा कर सकते हैं. झारखंड खनिज बहुल है. लेकिन, जेएसएमडीसी के जरिये विकास का काम कम और लूट ज्यादा होती है. इस निगम से जुड़े अधिकारी से लेकर ठेकेदार मालामाल हो गये, लेकिन निगम दरिद्र हो चुका है. कुछ ऐसी ही स्थिति आयडा की है. याद कीजिए, नोएडा की तर्ज पर ही आयडा का गठन किया गया था. यह पूर्वी भारत का छोटे व म्ांझोले उद्योगों का सबसे बड़ा केंद्र था. आज किस हालत में है? ज्यादातर उद्योग बंद हो गये हैं या यहां से अपना कारोबार समेटने की तैयारी में है. आयडा से उन्हें लाभ कम और प्रताड़ना ज्यादा मिलती है.
उद्यमियों के लिए बना आयडा उद्यमियों की सहायता शायद ही कर पाता है. हैरान-परेशान उद्यमियों को राहत देने के लिए बदलाव की जरूरत है. और यह जिम्मेदारी अब गीता कोड़ा के ऊपर है. उनसे लोग उम्मीद करेंगे, क्योंकि वह उस इलाके को जानती-समझती हैं. उद्योग-धंधे बचे रहेंगे, तो रोजगार का अवसर भी रहेगा. यह उम्मीद की जानी चाहिए कि निगम व बोर्ड की अध्यक्षता लेनेवाले कुरसी पर बैठ कर केवल अपने अहं की तुष्टि नहीं करेंगे, बल्कि अपने फैसलों से कुछ नया और बेहतर भी करेंगे.
