प्रभात खबर के माध्यम से मैं बताना चाहता हूं कि आज आये दिन निजी व गैर सरकारी स्कूलों में कमाई करने के नित नये हथकंडे अपनाये जा रहे हैं. इनकी मनमानी से छात्र और अभिभावक आर्थिक, शारीरिक और मानसिक रूप से त्रस्त हैं.
कभी ड्रेस के नाम पर, तो कभी किताबों के लिए, कभी पुनर्नामांकन के लिए तो कभी बस भाड़ा में वृद्धि के रूप में इन्हें सिर्फ पैसे ही चाहिए. इनके दामों में अवांछित वृद्धि हो रही है.
अभिभावकों को हमेशा यही भय सताता रहता है कि यदि उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से इसकी शिकायत की, तो उनके बच्चों की पढ़ाई और सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. जिन स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को आदर्श नागरिक बनने भेजते हैं, आज वही स्कूल उनके आदर्शो को ताक पर रख कर छात्रों और अभिभावकों को प्रताड़ित कर रहे हैं. सरकार कृपया ध्यान दे.
पंकज पीयूष, मधुपुर
