यदि देश की दशा-दिशा को बदलना है, तो सबसे पहले देश के समाज को बदलना होगा. जब तक देश का समाज नहीं बदलेगा, तब तक देश की राजनीति नहीं बदलेगी. यदि देश का समाज नहीं बदलता है, तो लोहिया, जेपी और गांधी के सिद्धांतों की हमेशा अवहेलना होती ही रहेगी. आज तक देखने को तो यही मिला है कि जिस राज्य में जैसा जनमत रहा है, उस राज्य की सरकार भी वैसी ही रही है.
जनमत का मतलब जनता के मत से नहीं, बल्कि जनता की सोच है. देश की राजनीति में आम आदमी पार्टी को अलग पार्टी दिखाने का प्रयास किया गया, लेकिन आखिरकार वह भी उन्हीं पुरानी पार्टियों के र्ढे पर चल पड़ी. इस नयी पार्टी में रोज बवाल पैदा हो रहा है, जो शांत लेने का नाम ही नहीं ले रहा है. स्थिति यह कि आंतरिक कलह से आम आदमी पार्टी भी बिखराव के कगार पर पहुंच गयी है.
चंद्रशेखर कुमार, रांची
