तपिश से पूर्व ही बिजली की कटौती

अभी कुछ दिनों पहले तक राज्य सरकार बड़े- बड़े दावे कर रही थी. बिजली विभाग के अभियंता यह कह रहे थे कि इस बार गर्मी में बिजली की अघोषित कटौती नहीं होगी और न ही किसी को इससे परेशानी ङोलनी पड़ेगी. उनका दावा था कि हम राज्य की बिजली व्यवस्था को पटरी पर ले आये […]

अभी कुछ दिनों पहले तक राज्य सरकार बड़े- बड़े दावे कर रही थी. बिजली विभाग के अभियंता यह कह रहे थे कि इस बार गर्मी में बिजली की अघोषित कटौती नहीं होगी और न ही किसी को इससे परेशानी ङोलनी पड़ेगी.
उनका दावा था कि हम राज्य की बिजली व्यवस्था को पटरी पर ले आये हैं, लेकिन गरमी की शुरुआत में ही भयंकर रूप से बिजली की कटौती की जा रही है. शहरी क्षेत्रों में पूरे 24 घंटों में सिर्फ 10 घंटे ही लोगों को बिजली मिल रही है. गांवों की स्थिति तो और भी बुरी है.
यह स्थिति तब है, जब अभी झारखंड में ढंग से गरमी पड़ भी नहीं रही है. अभी चिलचिलाती धूप की गरमी और रात में उमस होना बाकी ही है. बिजली की अघोषित कटौती से लोगों को अंदेशा होने लगा है कि इस बार भी पूर्व की तरह गरमी के दिन पसीना पोंछते हुए ही बिताने होंगे.
नवीन सिन्हा, जमशेदपुर

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