प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्तूबर में जब ‘मन की बात’ शुरू की, तो थोड़ा अटपटा लगा और बेताबी भी जगी कि आखिर इनके मन की बात है क्या? लेकिन जब इनके मन की बात रेडियो पर सुनी, तो महसूस हुआ कि वे हमारे आसपास रह कर बुराइयों को देख रहे है. वे इन बुराइयों से दूर करने के लिए हमें लगातार प्रेरित कर रहे हैं.
सामाजिक उत्थान के लिए व्यक्तिगत उत्थान बहुत आवश्यक है और इसके लिए सामाजिक कुरीतियों और कुसंगति को दूर करना बहुत ही जरूरी है. नशे की लत से जूझता युवा वर्ग हमारे भविष्य के लिए कितना घातक हैं, ये हम जानते हैं.
जब देश का प्रधानमंत्री हमें समझाने आये, तो मन का खुद-ब-खुद परिवर्तित होना लाजिमी हैं. आज भी हमारे देश के सबसे ज्यादा लोग गांवों में निवास करते हैं. गांवों में संचार का सबसे अच्छा साधन आज भी रेडियो ही है, जिसके द्वारा हम अपने समस्त देशवासियों से आसानी से बात कर सकते हैं. इसलिए मन की बात बताने के लिए रेडियो से बेहतर और कोई साधन नहीं हो सकता. यह किफायती भी है.
हाल ही में, ‘मन की बात’ में मोदी ने भारत के विकास को लेकर भूमि अधिग्रहण बिल पर जो विचार व्यक्त किये, वह हमारे लिए काफी प्रभावशाली सिद्ध हुआ. हमें उनकी बातें से यह समझ में आया कि इस बिल में हुए संशोधन के बाद यह हमारे हित में हैं.
अमेरिका जैसे देशों की बराबरी करने के लिए हमें औद्योगीकरण के रास्तों को अपना ही होगा, क्योंकि यह भी एक सार्वभौमिक सत्य है कि बिना कुछ खोये हम बहुत कुछ नहीं प्राप्त कर सकते. निश्चित रूप से मोदी रेडियो के जरिये अपनी बातों को जनता तक पहुंचाने में कामयाब हो रहे हैं. अब जनता उस पर कितना अमल करती है, यह देखना है.
रवि कुमार, ई-मेल से
