जीवन में हर समय मर्यादा का पालन करनेवाले श्रीराम का चरित्र अत्यंत प्रेरणादायी है. उनका जीवन त्याग और प्रेम से भरा था. श्रीराम का आचरण अनुकरणीय है. जो व्यक्ति एक आदर्श जिंदगी व्यतीत करना चाहता है, उसे श्रीराम के आचरण को जीवन में उतारना चाहिए. राम ने सीता को एक पत्नीव्रत रहने के कारण त्रिकुटा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
यहां राम वचन-पालन और पतिधर्म का परिचय देते हैं. वचनों का पालन करने के लिए उन्होंने सहर्ष वन जाना स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि माता का पद हमेशा आदरणीय होता है. केकैयी ने भले ही सौतेले में भेद किया, परंतु राम ने कोई भेद नहीं किया. उनके न्यायपूर्ण शासनकाल को रामराज्य की संज्ञा दी गयी. शबरी के जूठे बैर खा कर उन्होंने जातिभेद को मिटाने का संदेश दिया. बाली और रावण का वध कर दुष्टों के संहार का संदेश दिया.
पूनम गुप्ता, मधुपुर
