राजधानी रांची की जन वितरण प्रणाली की दुकानों में अब भी दुकानदारों की मनमानी चल रही है. सरकार लाख प्रयास कर ले यह रुकने वाली नहीं है. चावल हो या मिट्टी का तेल, दोनों ही वस्तुओं में नाप-तौल में गड़बड़ी हमेशा रहती है. 35 किलो चावल सरकार की ओर से दिया जाता है पर दुकानदार 30 किलो देते हैं और उसे घर में तौलने पर 28 किलो ही होता है, पर पैसा पूरे पैंतीस किलो का ही ले लेते हैं.
उसी तरह मिट्टी का तेल तीन लीटर की जगह दो ही लीटर मिलता है. इस विषय पर सिर्फ इतना कहना है कि जब सरकार से गरीबों के लिए पूरा सामान आता है तो वितरक को भी चाहिए कि सही-सही नाप-तौल दें. आपके अखबार के माध्यम से उन सभी लोगों का ध्यान इस विषय पर खींचना चाहती हूं. लाल कार्ड, पीला कार्ड धारक सभी लोग इसका विरोध करें तभी यह संभव हो सकेगा.
एक भुक्तभोगी
