मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पद संभालते ही शिक्षकों के लिए कई वादे किये, जिन्हें पूरा करना शायद वह भूल गये हैं. पारा शिक्षकों का मामला कई वर्षो से लंबित है. मुख्यमंत्री जी जैसे ही शिक्षकों के हित में फैसला लेने लगे, उसके बाद पारा शिक्षकों में एक आस जगी थी. लेकिन उन्हें घेरने गये पारा शिक्षकों की गिरफ्तारी सरकारी तानाशाही बयान करती है.
चूंकि मुख्यमंत्री तो हम आम जनों ने ही चुना है, तो क्या हमें इतना भी हक नहीं कि हमारा जो काम नहीं हो रहा है, वह भी हम उनसे पूछ सकें? ऐसा है, तो कोई भी नेता चुनाव के समय घर-घर ना आये. उसे कोई हक नहीं. सरकार को साफ-साफ बताना चाहिए कि उसने क्या निर्णय लिया है. अगर पारा शिक्षक स्थायी नहीं हो सकते, तो उन्हें बता दें. मुख्यमंत्री जी को सामने आकर मामले की पूरी सुधि लेनी चाहिए. ऐसे मुंह नहीं फेरना चाहिए.
पालूराम हेंब्रम, सालगाझारी
