ईश्वर ने हमें आदमी बना कर धरती पर भेजा है. चेहरे-मोहरे और रंग-रूप में भले ही बदलाव हो, लेकिन सबकी आकृति एक समान ही है. धरती पर हम जाति, धर्म, संप्रदाय में बंट गये हैं, जिस कारण समाज में भेद-भाव का बीजारोपण हुआ. ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, सांप्रदायिकता, लैंगिक भेदभाव का जहर फैला.
हम आपसी प्रतिस्पर्धा में व्यस्त हो गये. समाज में खाई पैदा हो गयी है. सुख-शांति, संतुष्टि, भाईचारा, मेल-मिलाप आदि का विलोप हो गया है.
आदमी को आदमी से आखिर भेदभाव क्यों? कोई अनपढ़ एक छोटा सा काम करते हुए अपनी जीविका चलाता है, तो उसे निकृष्ट क्यों समझा जाता है? समाज में हर वर्ग के लोग रहते हैं. धर्म, जाति, वर्ग, शैक्षिक योग्यता सबकी अलग-अलग है. सभी अपनी जीविका चलाते हैं. लोग आदमी को इंसानियत की नजर से क्यों नहीं देखते?
उदय चंद्र, रांची
