प्रभात खबर में प्रकाशित श्रृंखला ‘चिरंजीवी भव’ से जाना कि समय के साथ शरीर को चलानेवाली अलग-अलग प्रणालियां सुस्त पड़ जाती हैं. फिर एक दिन पूरी तरह से थम जाती हैं. ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिक खोजों की बदौलत इंसान सौ-डेढ़ सौ साल तक जीने में सक्षम हो रहा है. विज्ञान पहला प्रयोग जानवरों पर करता है, उसके बाद मनुष्य पर वह प्रयोग सफल होने की संभावना बढ़ जाती है.
लेकिन मनुष्य जानवर से भिन्न है. इंसान का शरीर और मन स्वस्थ रहे, तो वह दीर्घायु हो सकता है. हमारे धर्म-ग्रंथ और उपनिषद जीने की कला बताते हैं. योग, प्राणायाम और अल्पाहार से हम स्वस्थ्य एवं दीर्घायु होने के साथ चेहरे की आभा भी बना सकते हैं, लेकि हम दवाइयों से खुद को निखारना चाहते हैं. ऋषि-मुनि दीर्घजीवी होते थे. योग और प्राणायाम के साथ उनकी दिनचर्या महत्वपूर्ण थी.
गीता दुबे, जमशेदपुर
