गांधी-सुभाष की आलोचना जायज नहीं

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मरकडेय काटजू द्वारा महात्मा गांधी और नेता जी सुभाष चंद्र बोस की आलोचना समझ से परे है. यदि जस्टिस काटजू की निगाह में अंगरेजों के खिलाफ सशरूत्र संघर्ष छेड़नेवाले भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बिस्मिल आदि ही सच्चे देशभक्त थे, तो उस मापदंड पर सुभाष चंद्र बोस कहीं ज्यादा खरे उतरते […]

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मरकडेय काटजू द्वारा महात्मा गांधी और नेता जी सुभाष चंद्र बोस की आलोचना समझ से परे है. यदि जस्टिस काटजू की निगाह में अंगरेजों के खिलाफ सशरूत्र संघर्ष छेड़नेवाले भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बिस्मिल आदि ही सच्चे देशभक्त थे, तो उस मापदंड पर सुभाष चंद्र बोस कहीं ज्यादा खरे उतरते हैं, क्योंकि उन्होंने अंगरेजों के खिलाफ व्यापक सशस्त्र संघर्ष किया है.
गांधीजी की प्रतिमा की लंदन में स्थापना अंगरेजों के विश्वव्यापी स्वीकृति का सूचक है. गांधीजी ने तत्कालीन परिस्थितियों में जो कुछ भी अच्छा हो सकता था, किया. उनके निर्णयों को आज की परिस्थितियों के अनुसार मूल्यांकित कर खारिज नहीं किया जा सकता. काटजू साहब आज के नेताओं को कटघरे में खड़ा करने के बजाय महापुरुषों पर कटाक्ष क्यों कर रहे हैं.
रंजीत कुमार सिंह, झुमरीतिलैया

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