देश में भाषा की स्थिति दयनीय

हम एक ओर बच्चों को सुसंस्कृत शिक्षा देने की बात करते हैं और नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की जाती है, लेकिन देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग इस बात को दरकिनार कर देते हैं. खास कर भाषा के मामले में तो किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है. […]

हम एक ओर बच्चों को सुसंस्कृत शिक्षा देने की बात करते हैं और नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की जाती है, लेकिन देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग इस बात को दरकिनार कर देते हैं. खास कर भाषा के मामले में तो किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है.
भाषा किस दिशा में जा रही है, इसका किसी को ख्याल नहीं है. ऐसा ही एक वाकया परीक्षा भवन में देखने को मिला. नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा के हिंदी के प्रश्नपत्र के अपठित गद्यांश में अकबर के पिता के स्थान पर अभद्र शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसका उपयोग आम तौर पर गाली देने के लिए इस्तेमाल करते हैं. इस प्रश्नपत्र में दो बार एक ही शब्द का प्रयोग किया गया, जो सर्वथा निंदनीय है. हमें यह समझ में नहीं आता कि आखिर हमारे देश में भाषा की स्थिति दयनीय क्यों होती जा रही है?
डॉ अनीता शर्मा, ई-मेल से

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