ऐसा लगने लगा था कि इस महीने के अंत तक हाई स्कूल पास शिक्षकों की नियुक्ति हो जायेगी, मगर एक बार फिर से झारखंड में वही हुआ जिसकी आशंका थी. नियुक्ति से पहले लगभग दो सालों तक कोर्ट का चक्कर काट चुके इस मुद्दे ने राहत की सांस ही ली थी कि फिर से कोर्ट के द्वार पर ये मामला खड़ा हो गया.
किस्मत के मारे इन अभ्यर्थियों का तो जैसे-जैसे मुंह का निवाला छिन गया हो. भविष्य का सपना बुन चुके इन अभ्यर्थियों के दिन का चैन और रात की नींद ही हराम हो गयी है. हर बार गलतियों का खमियाजा बेरोजगारों को भुगतना पड़ता है. झारखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, मगर इस प्रकार के छलावों से हर एक अभ्यर्थी का मनोबल गिरता है. सरकार से तो मानो सबका भरोसा ही टूट गया. सही कहा गया है कि भाग्य से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी कुछ नहीं मिलता.
स्वर्ण गुप्ता, हजारीबाग
