पुरुषों की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए

कुछ दिन पहले महिला दिवस मनाया गया. महिला सशक्तीकरण के लिए यह जरूरी भी है. आज महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. बदलते समय के साथ उन्हें बराबरी का मौका मिलना ही चाहिए. समाज में महिलाओं को सम्मान मिलना बहुत अच्छी बात […]

कुछ दिन पहले महिला दिवस मनाया गया. महिला सशक्तीकरण के लिए यह जरूरी भी है. आज महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. बदलते समय के साथ उन्हें बराबरी का मौका मिलना ही चाहिए.
समाज में महिलाओं को सम्मान मिलना बहुत अच्छी बात है, लेकिन जब महिलाओं को पुरुषों की बराबरी पर लाया जा रहा है, तो सिर्फ महिला दिवस ही क्यों मनाया जा रहा है? दुनिया का कोई व्यक्ति ‘पुरुष दिवस’ क्यों नहीं मनाता? सिर्फ महिला दिवस मनाना भेदभाव की तरह लगता है. माना कि महिलाओं को ज्यादा प्रोत्साहन देने की जरूरत है, पर समाज को आगे ले जाने और विकास के लिए पुरु षों की भी तो जरूरत है. आज देश को महिलाओं पर नाज है, पर पुरुषों को नजरअंदाज न किया जाये.
पालूराम हेंब्रम, जमशेदपुर

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