अनुज कुमार सिन्हा
मुख्यमंत्री (वित्त के प्रभार में भी) रघुवर दास ने अपने पहले बजट में सबको खुश करने और किसी को नाराज नहीं करने का प्रयास किया है. किसी प्रकार का अतिरिक्त कर नहीं लगाया है. यह घाटे (लगभग 5171.47 करोड़) का बजट है. इसके बावजूद किसी प्रकार का जनता पर टैक्स नहीं लाद कर सरकार ने कुछ राहत दी है.
कुछ दिनों पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सर्विस टैक्स में जिस तरीके से बढ़ोत्तरी की, स्वच्छता के नाम पर दो फीसदी अतिरिक्त टैक्स लाद दिया, उससे आम जनता पहले से परेशान है. रघुवर दास ने यह प्रयास किया कि झारखंड की जनता पर इस समय कोई और ऐसा बोझ नहीं लादा जाये, जिसे वह सह नहीं सके. बजट भाषण में रघुवर दास ने जो घोषणा की है, जो प्रावधान किया है, उसकी झलक सरकार बनने के बाद से ही मिलने लगी थी. सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर दिया है. यह सत्य है कि झारखंड लंबे समय से विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. इसी विकास के नाम पर राज्य में नयी सरकार भी बनी है. इसलिए बजट में उन योजनाओं को जमीन पर उतारने पर बल दिया गया है, जिससे झारखंड को विकसित राज्य बनने में मदद मिल सकती है.
बगैर शिक्षा के कुछ हो नहीं सकता. बच्चों को समय पर किताब नहीं मिलती, यूनिफार्म नहीं मिलता. सरकार ने बजट में न सिर्फ यूनिफॉर्म का प्रावधान बरकरार रखा है, बल्कि बच्चों को जूता-मोजा खरीदने के लिए पैसा देना की घोषणा की है. इसका बच्चों के व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ेगा. राज्य में 475 नये स्कूल खोलने से अब पढ़ाई के लिए बच्चों को दूर नहीं जाना होगा. हर प्रखंड में कस्तूरबा विद्यालय खुलेंगे. सरकार का ध्यान बेहतर स्वास्थ्य सेवा की ओर भी है. कई नये अस्पताल खोलने की योजना है. चाहे वह मांडर में कैंसर अस्पताल की बात हो या फिर इटकी में मेडिकल सेंटर की. रिम्स को एम्स से बेहतर बनाने की योजना है. बेरोजगारी बड़ी समस्या है. सरकार ने एक लाख लोगों को रोजगार देने की बात कही है. पर यह तब तक नहीं होगा, जब तक राज्य में नये-नये संस्थान नहीं खुलते. इसलिए रांची, हजारीबाग और पलामू में मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही गयी है. हेमंत सरकार ने पत्रकारों का बीमा कराया था. इस सरकार ने उसे आगे बढ़ाया है. असाध्य बीमारियों के लिए बीमा कर पत्रकारों को भी राहत दी है. किसानों को पंप और मुफ्त बिजली से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. हाल के वर्षो में झारखंड में किसानों ने सिंचाई की सुविधा नहीं होने के बावजूद बेहतर उत्पादन कर दिखाया है.
सरकार ने छोटे उद्योगों पर भी ध्यान दिया है. कच्चा माल पर वैट आधा करने से राज्य के छोटे और मंझोले उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. यह सही है कि राजधानी रांची में जगह का अभाव है और यहां कई संस्थानों को जगह नहीं मिल पा रही है. ट्रैफिक की समस्या है. जब तक नयी राजधानी नहीं बनती है, समस्याएं कम नहीं होंगी. इसे सरकार ने प्राथमिकता की सूची में रखा है. रांची-बोकारो एक्सप्रेस हाइवे का प्रस्ताव है. रांची में मोनो रेल चलाने की योजना है. खूंटी में नॉलेज सिटी का प्रस्ताव है. खेल विश्वविद्यालय की घोषणा भी की गयी है.
बजट भाषण में इसे शामिल कर सरकार ने यह जाहिर कर दिया है कि ये चीजें उसकी प्राथमिकता में है. अब सरकार के पास चुनौती होगी, इसे जमीन पर उतारने की. इसके लिए अब राज्य सरकार के पास संसाधन की कमी भी नहीं होगी. झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य को जिस तरीके से केंद्र से पैसा मिलने जा रहा है (चाहे वह नीलामी से हो या रॉयल्टी से), वह राज्य के विकास में सहायक हो सकता है. अब जरूरत है, जल्द से जल्द इन योजनाओं पर काम आरंभ करने की. उसे धरातल पर उतारने की.
