पहले संसाधनों का हो भरपूर दोहन

जब कोई मुख्यमंत्री और वह भी झारखंड के मुख्यमंत्री कहते हों कि झारखंड दूसरे राज्यों को बिजली देगा, तो उनके हाव-भाव और बोलने के अंदाज को ध्यान में रखना होगा. आज तक झारखंड के किसी मुख्यमंत्री का अंदाज ऐसा नहीं रहा, जो आम आदमी को अपनी बातों से भरोसा दे सके कि उसके द्वारा किया […]

जब कोई मुख्यमंत्री और वह भी झारखंड के मुख्यमंत्री कहते हों कि झारखंड दूसरे राज्यों को बिजली देगा, तो उनके हाव-भाव और बोलने के अंदाज को ध्यान में रखना होगा. आज तक झारखंड के किसी मुख्यमंत्री का अंदाज ऐसा नहीं रहा, जो आम आदमी को अपनी बातों से भरोसा दे सके कि उसके द्वारा किया जानेवाला फलां काम सफलीभूत होगा ही. फिर भी मौजूदा मुख्यमंत्री की बातों पर अविश्वास करने का कोई वजह नहीं बनती है.

मुख्यमंत्री जब खुलेआम कह रहे हों कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकती, तो राज्य के लोगों को भरोसा करना ही पड़ता है. जहां तक दूसरे राज्यों को बिजली देनेवाली बात है, तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि हमारा राज्य ऐसा नहीं करेगा. वह निश्चित तौर पर दूसरे राज्यों को बिजली देने में सक्षम है, लेकिन तब जब यहां का प्रशासन और सरकार भ्रष्टाचारमुक्त हो तब.

हमारे राज्य में न केवल कोयला बल्कि यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ के अलावा जल के भी अच्छे स्नेत हैं, जिनका उपयोग करके बिजली बनायी जा सकती है. कोयले से बिजली उत्पादन के अलावा बरसाती और बारहमासी नदियों के माध्यम से जलप्रपातों आदि से भी बिजली का उत्पादन किया जा सकता है. प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके अधिक से अधिक बिजली का उत्पादन किया जा सकता है. हमारे यहां पहले से ही दामोदर घाटी परियोजना के माध्यम से कई स्थानों पर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. इसके अलावा अन्य कई स्थानों पर नये संयंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है. साथ ही, खनिज पदार्थो के दोहन के लिए केंद्र पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर होना पड़ेगा.

डॉ भुवन मोहन, रांची

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