इंसानों का देश कब बनेगा भारत?

महीनों से देश में एक अजीब तरह की हवा बह रही है. यह एक तरह की आवारा हवा है, जो लोगों के मन-मस्तिष्क को ही खराब कर रही है. लोगों के दिलो-दिमाग में कूट-कूट कर कट्टरता का संचार कर रही है. कोई यह कहता हुआ पाया जाता है कि इस देश को इसाइयों का देश […]

महीनों से देश में एक अजीब तरह की हवा बह रही है. यह एक तरह की आवारा हवा है, जो लोगों के मन-मस्तिष्क को ही खराब कर रही है. लोगों के दिलो-दिमाग में कूट-कूट कर कट्टरता का संचार कर रही है. कोई यह कहता हुआ पाया जाता है कि इस देश को इसाइयों का देश बनायेंगे, तो कोई नेपाल की माफिक विशुद्ध हिंदू राष्ट्र बनाने का राग अलापता हुआ पाया जा रहा है.
कहीं किसी कोने से यह भी आवाज सुनाई देती है कि यदि लोग इसे हिंदू और इसाई देश बना ही रहे हैं, तो इसलामी देश बनाने में बुराई ही क्या है? इस आवारा हवा के बीच इन बातों को सुन मन कहता है कि क्या भारत कभी इंसानों का लोकतांत्रिक देश नहीं बन सकता? यहां हर घर में आदमी तो रहता है, लेकिन इंसानों की कमी दिखायी देती है. क्या कोई आदमी को इंसान नहीं बनायेगा? इंसान बनाये तो अच्छा ही होता.
दीपक क्रांति चौधरी, कुड़

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